टीकाकरण को लेकर नेताओं की तू – तू मैं – मैं के बीच फंसी जनता।

प्रधान संपादक -विनीत माहेश्वरी

कोरोना को लेकर भारत में कितनी जबरदस्त टिका टिपण्णी चल रही है।
नेता लोग सरकारी बंगलों में पड़े पड़े एक दूसरे पर बयान- बाणों की वर्षा कर रहे हैं।
हमारे दब्बू और डरपोक नेता मैदान में आकर न मरीजों की सेवा कर रहे हैं न भूखों के भोजन का इंतजाम कर रहे हैं।
हमारे साधु संत पंडित -पुरोहित और मौलवी -पादरी जरा हिम्मत करें तो हमारे लाखों मंदिरों ,मस्जिदों’, गिरिजाघरों आर्य भवनों में करोड़ों मरीज
के इलाज का इंतजाम हो सकता है।कितने शर्म की बात है सैकड़ों शव नदियोंया है में तैर रहे है , कब्रिस्तानों और शमशानों में लाइनें लगी हुई है और प्राणवायु के आभाव में
दर्जनों लोग अस्पताल में दम तोड़ रहे हैं। गैर सरकारी अस्पताल अपनी चाँदी कूट रहे हैं।
गरीब और माध्यम वर्ग के लोग अपनी ज़मीन,घर जेवर बेच बेच कर अपने घर अपने घर परिवार रिश्तेदारों की जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। सैकड़ों लोग नकली इंजेक्शन ,नकली सिलेण्डर और नकली दवाइयां धड़ल्ले से बेच रहे हैं। वे कालाबजारी कर रहे हैं।
वे हत्या के अपराधी हैं लेकिन भारत की शासन व्यवस्था उन पर कितनी मेहरबान है की उन्हें थाने या जेल में बिठाकर मुफ्त में खाना खिला रही है और कोरोना की महामारी से उनकी रक्षा कर रही है
मेरे कई निजी मित्रों ने करोड़ों रूपए दान कर दिए है कइयों ने अपने गांव शहरों में में तत्कालिक अस्पताल खोल दिए हैं और भूखों के लिए भंडारे चला दिए हैं। मेरे कई साथी ऐसे भी हैं, जो दिन रात मरीजों का इलाज करवाने , उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाने और उनके लिए अस्पताल में ऑक्सीजन का इंतजाम करवाने में जुटे रहते हैं।
ऐसा नहीं है की केंद्र और सभी दलों की राज्य सरकारों के प्रति मोहभंग का माहौल है। प्रधानमंत्री और बांकी सारे मुख्यमंत्री मिलकर यह
फैसला क्यों नहीं करते की कोरोना की वैक्सीन कहीं से भी लानी पड़े सबको मुफ्त मुहैया करवाई जाएगी। इस वक्त चल रहे सेंट्रल विस्टा
जैसे कई खर्चीले काम टाल दिए जाएं और विदेशों से भी वैक्सीन खरीदी जाएं। अब तकिप्प्णी बंद कर भारत में 17 करोड़ से ज्यादा लोगों को टीका लग चूका
है इतने टीके अभी तक किसी देश में नहीं लगे हैं इस वक्त जरूरी यह है की नेतागण आपसी टीका टिप्पणी बंद करे और टीके पर ध्यान लगाए।

द न्यू हिन्द

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Author: thenewhind

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