The world’s first such software, in which the formula of any skin product will be known as soon as you know how effective the product is on the skin. | दुनिया का पहला ऐसा सॉफ्टवेयर, जिसमें किसी भी स्किन प्रोडक्ट का फॉर्मूला डालते ही पता चल जाएगा कि प्रोडक्ट त्वचा पर कितना असरदार

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भोपाल17 मिनट पहलेलेखक: रश्मि खरे

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पीएचडी छात्र शुभम जायसवाल के साथ (बाएं) डॉ. विनीत कुमार शर्मा।

लॉकडाउन में हैंड सैनिटाइजर से त्वचा संबंधी समस्याएं होने की खबरें खूब आईं। कौन सा प्रोडक्ट त्वचा के लिए अच्छा है और कौन सा नुकसानदेह, हम प्रोडक्ट खरीदते समय ये पता नहीं कर सकते। यदि पता करना हो तो प्रोडक्ट की लैब में टेस्टिंग करानी पड़ती है, जिसमें दो से तीन सप्ताह का समय लग जाता है, लेकिन भोपाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (ISER) की रिसर्च टीम ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया है जो दो से तीन मिनट में बता देगा कि स्किन पर किसी भी चीज का रिएक्शन कैसा होगा।

इस सॉफ्टवेयर का नाम है स्किनबग। करीब डेढ़ साल की मेहनत के बाद बने इस सॉफ्टवेयर की रिसर्च पिछले साल मई में पूरी हुई और इसे पिछले महीने 10 दिसंबर को इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल ‘आई-साइंस’ में प्रकाशित किया गया है। आई-साइंस के प्रिंट जर्नल में 22 जनवरी के अंक में यह प्रकाशित होगा। आई-साइंस ने कहा है कि माइक्रोब्स से जुड़ी भविष्यवाणी करने वाला यह दुनिया का पहला सॉफ्टवेयर है। इस रिसर्च में क्षितिज अग्रवाल और परीक्षित थोडम भी शामिल रहे।

सॉफ्टवेयर में 900 बैक्टीरिया और उनके 10 लाख से ज्यादा संभावित रिएक्शन की जानकारी

रिसर्च टीम के प्रमुख और प्रोफेसर डॉ. विनीत कुमार शर्मा ने बताया कि जब भी त्वचा पर कोई क्रीम, तेल, लोशन लगाया जाता है, वहां मौजूद माइक्रो बैक्टीरिया उसके साथ रिएक्शन शुरू कर देते हैं। हम आंतों और स्कैल्प के माइक्रोब्स पर सालों से स्टडी कर रहे हैं। इसमें एक-एक मॉलीक्यूल की पड़ताल में जब महीनों का समय लगता था, तब आइडिया आया कि क्यों न इंसानी शरीर पर पाए जाने वाले सभी तरह के बैक्टीरिया की जानकारी का डिजिटाइजेशन करें।

डेढ़ साल की मेहनत कर हमने स्किनबग सॉफ्टवेयर तैयार किया, जोकि 90% से अधिक सही परिणाम देता है। इस सॉफ्टवेयर में 900 तरह के बैक्टीरिया की जानकारी है, जोकि 10 लाख 94 हजार संभावित रिएक्शन के बारे में बताता है। सॉफ्टवेयर ये भी बताता है कि शरीर के 19 अलग-अलग हिस्सों पर प्रोडक्ट कितना प्रभावी होगा।

सॉफ्टवेयर में सभी बैक्टीरिया की जानकारी बाइनरी नंबर में दर्ज है। जब प्रोडक्ट का फॉर्मूला या मॉलीक्यूल कॉम्बिनेशन इसमें डाला जाता है तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल कर सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट का प्रिडिक्शन बता देता है कि यह शरीर पर क्या असर डालेगा।

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Author: thenewhind

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